हमारे नेताजी
पर्दे से
निकले वो
बाहर आये
लगने लगे
कुछ
तालिंयां
कुछ
नारे
कुछ
हंसी के फव्वारे
हाथ जोड नजरे बचा
लोंगो
के कानों में
वाणी
रस घोलने लगे
कहते
कहते
बीच
में ही रुक गये
कुछ
दिल में
सोचने
लगे
बेचारी
जनता को
वोटों
के लिये
वादों
से
अपने
तराजू पर
जनता को तौलने लगे
हटायेंगे
गरीबी
दुर
होगी बेरोजगारी
खत्म
होगी भ्रष्टाचारी
ये
कहे ही थे कि
तालिंया
बजने लगे
तालिंयो
की
गडगडाहट
सुन
कटिल
मुस्कान लिये
हाथ
हिलाते वो जाने लगे
भोली भाली (?) जनता उनके गुण गाने लगी